अंटार्टिका की ज्वालामुखी गुफाओं में हो सकता है अनजान जीवन

क्या है खास वर्फ का पहाड़ टूटने से गुफाओं का पता चला गत वर्ष जुलाई में टूटकर अलग हुआ था यह पहाड़ 5130 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का था हिमखंड खोज में मिले ...

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क्या है खास

  • वर्फ का पहाड़ टूटने से गुफाओं का पता चला
  • गत वर्ष जुलाई में टूटकर अलग हुआ था यह पहाड़
  • 5130 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का था हिमखंड
  • खोज में मिले नये किस्म के जीवन के डीएनए के अंश
  • अब और भी तेजी से पिघलने लगे हैं वहां के वर्फ के खंड

नईदिल्लीः वर्फ के अपरिचित गुफाओं में नये किस्म के जीवन भी हो सकते हैं। जैसे जैसे वर्फ पिघल रहा है, वैज्ञानिक भी अंटार्टिका के रहस्यों को लेकर अचंभित हो रहे हैं।

अधिकतम 25 डिग्री तापमान की इन गुफाओं के जीवन और हाल चाल के बारे में अब तक कोई खास जानकारी वैज्ञानिकों को नहीं थी।

अब वहां के हालात बदल रहे हैं तो शोध करने वालों को पहली बार इस किस्म की ज्वालामुखी से बनी गुफाओं का पता चल रहा है।

पूर्व में ये वर्फ की पहाड़ के नीचे दबे पड़े थे। अब ऐसा माना जा रहा है कि वहां नये किस्म के प्राणी और पौधे भी हो सकते हैं, जिनके लिए यह तापमान अत्यंत ही सुखद है।

सक्रिय ज्वालामुखी है माउंट एरेबस

वर्फ के नीचे जीवनशोध करने वालों ने माना कि माउंट एरेबस एक सक्रिय ज्वालामुखी है।

अंटार्टिका के रोस द्वीप पर स्थित इस ज्वालामुखी के आस पास अनेक गुफाएं हैं।

इन गुफाओं का निर्माण भी ज्वालामुखी की वजह से ही हुआ है।

वहां की जमीन की जांच की गयी है।

मिट्टी के नमूने यह बताते हैं कि वहां शैवाल और अन्य प्रजाति के पौधे तथा कुछ दूसरे किस्म के प्राणी हो सकते हैं।
डॉ सेरिड्वेन फ्रेजर ने कहा कि इन गुफाओं में पाये गये तमाम डीएनए अंटार्टिका क्षेत्र के ही हैं।

आस्ट्रेलियन राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के इस वैज्ञानिक ने इस क्रम में कहा कि

कुछ डीएनए प्रजाति ऐसी है, जिनके बारे में पहले से कोई सबूत उपलब्ध नहीं है।

इसलिए उनकी पहचान नहीं हो पायी है। खासकर ऐसे नमूने आगे शोध को बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं।
डीएनए के ये नमूने हमें इतना तो बता रहे हैं कि वर्फ के नीचे जीवन के कुछ अंश मौजूद हैं।

इसलिए यह संभावना बढ़ जाती है कि दुनिया को नये किस्म के प्राणियों और पौधों का भी पता चले।

ग्लेशियर के नीचे दबे होने की वजह से इन गुफाओं में जीवन के पनपने के पूरे अवसर रहे हैं।

खासकर वहां का तापमान भी जीवन के पनपने के अनुकूल रहा है।

इसी वजह से शोधदल आगे की कार्रवाई जारी रखना चाहता है।

टी शर्ट पहनकर रह सकता है आदमी

वर्फ के नीचे जीवनइन गुफाओं का तापमान कुछ ऐसा है कि आम आदमी सिर्फ टी शर्ट पहनकर भी वहां रह सकता है।

गुफाओं के मुंह पर वर्फ के ऊपर से सूरज की रोशनी भी आती है।

कुछ इलाकों में वर्फ की चादर पतली होने की वजह से रोशनी की प्रचुरता भी है।

यह जीवन के पनपने के लिए आदर्श परिवेश है।
जो नये किस्म के डीएनए पाये गये हैं, उनकी पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन अब मिले नमूनों की वजह से गुफा के अंदर बेहतर तरीके से झांकना अब जरूरी हो गया है।

यह इंसान के लिए नये किस्म की सोच के दरवाजे खोल सकता है। यह विचार मेइन विश्वविद्यालय के सह शोधकर्ता प्रो लैरी कोनेल ने व्यक्त किये हैं।

वैज्ञानिकों को अब तक वहां की कुल गुफाओं का पता भी नहीं चल पाया है।

जांच के क्रम में सिर्फ कुछ गुफाओं की पहचान हो पायी है।

माना जा रहा है कि सक्रिय ज्वालामुखी की वजह से वहां और भी गुफाओं का निर्माण हुआ होगा।

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