क्या अधिकारियों को घूस देता है यूनिसेफ ?

संवाददाता रांची:राज्य में यूनिसेफ का भी बोलबाला है। कुपोषण से बच्चों की मौत के मामले की जांच से राज्य में यूनिसेफ के प्रभाव का पता चल रहा है। कुपोषण स...

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संवाददाता
रांची:राज्य में यूनिसेफ का भी बोलबाला है। कुपोषण से बच्चों की मौत के मामले की जांच से राज्य में यूनिसेफ के प्रभाव का पता चल रहा है।

कुपोषण से बच्चों की मौत और राज्य में पोषाहार वितरण के मामले की जांच हर रोज नये खुलासे कर रही है।

छह महीने तक पोषाहार का टेंडर निष्पादित नहीं होना अपने आप में सरकारी लापरवाही का एक बड़ा नमूना है।

अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि यूनिसेफ द्वारा राज्य के अधिकारियों को विधिवत पैसे दिये जाते हैं।

अनेक वरीय अधिकारियों को इस बात की जानकारी है।

कहा तो यह जा रहा है कि अधिकारियों को उनके वेतन का बीस प्रतिशत तक यूनिसेफ से मिलता है।

कार्य भत्ता के बहाने होने वाले इस भुगतान का असली मकसद निजी फर्मों की सिफारिशों को आंख मूंदकर स्वीकार करने के अलावा कुछ भी नहीं है।

वैसे इस सूचना की पुष्टि नहीं होने के बाद भी विभागीय स्तर पर किसी ने इस सूचना का स्पष्ट तौर पर खंडन भी नहीं किया है।यूनिसेफ

यूनिसेफ के बारे में कैसे मिली जानकारी

पता चला है कि जिन विभागों के काम काज से यूनिसेफ का जुड़ाव होता है, उन विभागों के अधिकारियों को यह पैसा दिया जाता है।

यह अलग जांच का विषय बन गया है।

यूनिसेफ की तरफ से यह भुगतान सरकारी अधिकारियों को कैसे होता है, इसकी जांच जरूरी है।

इसके साथ ही यह भी पता चलना चाहिए कि सरकार से वेतन पाने वाले अधिकारी किन नियमों के तहत किसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी द्वारा दिये गये वाले धन को प्राप्त करते हैं।

इसके लिए किसका आदेश है अथवा क्या यह नियमानुकूल है, इसकी पुष्टि भी नहीं हो पायी है।

केंद्र सरकार की सिफारिशों को प्रतिकूल यहां तीन संस्थानों को यूनिसेफ की इच्छा पर काम करने को कहा गया है।

कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यूनिसेफ ने जिस किस्म के पोषाहार की सिफारिश की है,

उसी से सारे मामलों का खुलासा हो रहा है।

सूत्रों की मानें तो राज्य गठन के बाद से ही घूसखोरी की यह प्रथा चालू है।

अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी द्वारा अधिकारी के वेतन का करीब बीस प्रतिशत भुगतान किया जाता है।

यह स्पष्ट नहीं है कि सरकारी अधिकारी को किसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी से प्राप्त करने का हक है।

वैसे पैसा लेने की वजह से यूनिसेफ का राज्य सरकार के अधिकारियों पर दबाव साफ नजर आता है।

शायद इसी वजह से झारखंड के पोषाहार विभाग का यह हाल है।

यहां के अधिकारी यूनिसेफ की सिफारिश पर भी अमल करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

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